[ नेहा पांडेय देवरस ] अलीबाबा, फॉक्सकॉन और सॉफ्टबैंक से ताजा फंडिंग पाने के बाद ऑनलाइन मार्केटप्लेस स्नैपडील का वैल्यूएशन 4 अरब डॉलर से ज्यादा आंका जा रहा है। 2010 में स्नैपडील की शुरुआत हुई थी। अगर आपने तब इसमें 10 लाख रुपये का निवेश किया होता तो आज आपके निवेश की वैल्यू 19.8 करोड़ रुपये हो गई होती। अगर आपने 2007 में फ्लिपकार्ट में यही रकम लगाई होती तो आपका निवेश आज 30 करोड़ रुपये हो गया होता। ओलाकैब्स में 2011 में लगाए गए 10 लाख रुपये आज 6.9 करोड़ रुपये हो गए होते। तो इस शानदार सफर का हिस्सा बन जाने से चूक जाने के बाद क्या अब आप एंजेल इनवेस्टर बनने की सोच रहे हैं। ऐसा है तो दोबारा सोचिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम रिटेल इनवेस्टर के लिए एंजेल इनवेस्टिंग का मामला काफी रिस्की होता है। जानेमाने एंजेल इनवेस्टर और गूगल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन आनंदन का कहना है, '10 में से सात वेंचर दम तोड़ देते हैं।' इसका मतलब यह हुआ कि आपका पूरा निवेश डूबने का जोखिम 70% है। आप यह मान सकते हैं कि आप तो ऐसी कंपनी में पैसे लगा रहे हैं, जो आगे चलकर ओला या फ्लिपकार्ट सरीखी बन जाएगी, लेकिन अगर उस कंपनी को वेंचर कैपिटल फंडिंग नहीं मिल सकी तो 300% रिटर्न पाने की आपकी उम्मीदें धराशायी हो जाएंगी। यह भी हो सकता है कि मूलधन वापस पाने के लाले पड़ जाएं। मुंबई में काम करने वाले फाइनेंशियल प्लानर सुरेश सदगोपन का कहना है, '30,000 रुपये मासिक खर्च वाला शख्स 3.50 करोड़ रुपये के रिटायरमेंट कॉरपस के साथ आराम से 25 साल तक जीवन यापन कर सकता है। लिहाजा मेहनत की कमाई को इधर-उधर न लगाएं।' फिर दूसरी नकारात्मक बात यह है कि स्टार्टअप में निवेश करने से आपका पैसा लंबे समय तक के लिए फंस जाता है। जब तक वेंचर कैपिटलिस्ट्स उस स्टार्टअप में पैसे न लगाएं, आपको अपना निवेश भुनाने का मौका शायद ही मिले। वीसी फंडिंग के लिए हाथ-पैर मारने वाले प्रमोटर्स तो आपका हिस्सा खरीदेंगे नहीं और सेकेंडरी मार्केट यानी दूसरे इनवेस्टर्स के हाथ इसे बेचना बहुत मुश्किल होता है। हालांकि अगर इन जोखिमों के बावजूद आप कदम बढ़ाना चाहते हैं तो स्टार्टअप को चुनने में खूब स्टडी करें। बिजनेस मॉडल, सफलता की संभावना, दी जा रही सर्विस के लिए मार्केट में डिमांड, मैनेजमेंट और फाउंडर्स की क्वॉलिटी जैसी बातों पर गौर करें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी मेहनत कोई रिटेल इनवेस्टर शायद ही कर पाए। सदगोपन ने कहा, 'स्टार्टअप्स तो ढेर सारी हैं। किसी एक शख्स के लिए इतने कारोबारों को एकसाथ समझ पाना आसान नहीं होता है। औसत रिटेल इनवेस्टर तो म्यूचुअ फंड्स को नहीं समझ पाता तो स्टार्टअप्स को कैसे समझेगा?' हालांकि GREX जैसे स्टार्टअप इनवेस्टिंग प्लेटफॉर्म एक विकल्प भी देते हैं। GREX किसी मार्केटप्लेस की तरह है, जहां इनवेस्टर्स और स्टार्टअप्स मिलते हैं। स्टार्टअप्स में निवेश करने की चाहत रखने वाले इस प्लेटफॉर्म पर 6,000 रुपये की सालाना फीस देकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। GREX के एक्सपर्ट्स का एक पैनल स्टार्टअप्स के दमखम का अंदाजा लगाने के बाद उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर 10,000 रुपये की सालाना फीस पर रजिस्ट्रेशन कराने की इजाजत देता है। GREX पर रजिस्टर्ड इनवेस्टर्स अपनी पसंद की स्टार्टअप में निवेश कर सकते हैं। उन्हें इस पर रजिस्टर्ड कंपनियों से अपडेट्स मिलते रहते हैं। कोई इनवेस्टर हिस्सा बेचना चाहे तो वह इस प्लेटफॉर्म पर वह प्राइस कोट कर सकता है, जिस पर उसने शेयर खरीदे थे और जिस भाव पर वह इन्हें बेचना चाहता है। GREX पर रजिस्टर्ड लोग इस पर गौर कर सकते हैं। GREX के जरिए करीब 15 लाख रुपये इनवेस्ट करने वाले दिल्ली के आईटी प्रोफेशनल विकास कुमार का कहना है, 'जो लोग स्टार्टअप्स में निवेश करना चाहते हैं, उनकी समस्याएं GREX दूर कर रही है।' कुमार ने अपने टोटल इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो के 10% की लिमिट स्टार्टअप में निवेश के लिए बनाई है।
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